Thursday, 4 October 2018

कुछ तो बाकी है।

सब ख़त्म हो कर भी 
दोनों के दरमियाँ
कुछ तो बाकी है। 

तड़पता है दिल 
तो मचलते है वो भी 
उनके सीने में भी 
दिल दीवाना अभी बाकि है। 

तय हुआ है 
मिलना उसी मोड़ पर 
हुए थे रस्ते अलग जहां 
हम  तो पहुँच गए 
बस उनका आना 
अभी बाकी है। 

उनका देर से आना 

और छुप कर हमें  सताना 
अभी बाकी है। 

सुक्र है आये तो सही 
देख कर हमे 
मुस्कुराना अभी बाकि है। 
राजेश कुमार 

Sunday, 21 January 2018

चारो तरफ था  नशा ही नशा 

मिली तुझसे नज़र ,
हुआ ऐसा असर,
दिल ने हरकत दिखाई,
दिल धड़कने लगा | 
अब जो आलम था ,
ऐसा अभी तक न था,
के चारो तरफ था  नशा ही  नशा || १ |
था वो मौसम,
वो मौसम था,
बारिश का परररर......... 
आग ऐसी लगी,
तन सुलगने लगा ,
तेरी अंगड़ाईयाँ,
होठों की सुर्खियां,
नशा फैला रही,
आँखों की मस्तियाँ,
हमने समझाया हमने,
बहुत दिल को पर,
दिल पे काबू रहा न,
ये मचलने लगा,
के चारो तरफ था  नशा ही नशा || २|| 
हाथ में ज़ाम था,
जो तेरे नाम था,
देखा तुझको तो,
वो भी छलकने लगा,
जाने क्या था  नशा,
तेरे रुख्सार में,
देखा तुझको तो मय भी,
बहकने लगा,
के चारो तरफ था  नशा ही नशा || ३ ||


राजेश कुमार 

Sunday, 24 December 2017

aaj fir hatho me jaam aaya hai

आज फिर हाथों में ज़ाम आया है | 

आज फिर होठों पर उनका नाम आया है ,
कुछ इस तरह हरे हुए हैं, 
ज़ख्म मोहब्बत के ,
के आज फिर हाथों में जाम आया है | १ | 

पिला कुछ इस तरह ऐ साकी,
के भूल जाए दिल सारे गम ,
तबाह -ए -दिल से ,
ये पैगाम आया है |
के आज फिर हाथों में जाम आया है | २  |

 गुज़रे जो गली से उनकी नशे में ,
बहके कदम कुछ इस तरह ,
गिरे जा कर उनकी बाहों में ,
अरे पीना ही सही ,
आज तो पीना भी हमारे काम आया है | 
के आज फिर हाथों में जाम आया है | ३  |

देख कर मदहोश हमें ,
निगाहें चुरा ली उन्होंने शरम से ,
क्या कहे यारों ,
थोड़ा सा ही सही,
दिल को कुछ तो आराम आया है | 
के आज फिर हाथों में जाम आया है | ४  |

पा कर हमें वो मयकशी में ,
हॅसे वो करके बातें हमारी उल्फत की ,
मज़ाक में ही सही ,
लबों पर उनके हमारा नाम तो आया है | 
के आज फिर हाथों में जाम आया है | ५  |

वो करके बेवफाई बेवजह ही रो दिये,
और सह कर दिल -ए -ज़ख्म ,
मुस्कुराते है हम,
तो हम पर बेवफाई का इल्ज़ाम आया है | 
के आज फिर हाथों में जाम आया है | ६  |

क्यों पुरे नहीं हुए वफ़ा के वादे ,
क्यों न निभाई गई कसमें ,
सोचता है दिल ,
क्यों मेरी मोहब्बत में ये अंज़ाम आया है | 
के आज फिर  हाथों में जाम आया है | ७  |


कुछ तो बाकी है। सब ख़त्म हो कर भी  दोनों के दरमियाँ कुछ तो बाकी है।  तड़पता है दिल  तो मचलते है वो भी  उनके सीने में भी  दिल...